श्रीलंका में आज से शुरू होगी भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी
नई दिल्ली, 4 फरवरी।
भारत और श्रीलंका के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष भारतीय वायुसेना के विमान C-130J से नई दिल्ली से श्रीलंका रवाना किए गए हैं। इन पवित्र अवशेषों को कोलंबो के प्रसिद्ध गंगारामया मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा।
यह प्रदर्शनी दोनों देशों के साझा बौद्ध विरासत को सम्मान देने और आध्यात्मिक जुड़ाव को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
4 से 11 फरवरी तक कोलंबो में दर्शन
कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग के अनुसार, पवित्र अवशेष 4 से 11 फरवरी तक गंगारामया मंदिर में रखे जाएंगे।
भक्तों के लिए सार्वजनिक दर्शन और पूजा 5 फरवरी से शुरू होगी। 11 फरवरी 2026 को इन अवशेषों को वापस भारत लाया जाएगा।
इस दौरान बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षुओं, श्रद्धालुओं और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्रियों के आने की संभावना जताई जा रही है।
सांस्कृतिक कूटनीति का महत्वपूर्ण कदम
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा का हिस्सा है, जिसके तहत भारत अपनी बौद्ध विरासत को दुनिया के साथ साझा कर रहा है। इसका उद्देश्य सीमाओं के पार सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करना है।
भारतीय उच्चायोग ने प्रधानमंत्री के एक भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वियतनाम से मंगोलिया और थाईलैंड से रूस तक अपनी बौद्ध धरोहर साझा करता रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि जहां-जहां भी भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष गए हैं, वहां श्रद्धा और भक्ति की लहर देखने को मिली है।
श्रीलंका ने बताया ‘अनूठा आशीर्वाद’
भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त महिशिनी कोलोन ने इस पहल को श्रीलंका के लिए “एक अनोखा आशीर्वाद” बताया। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का यह पहला अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन है और इसके लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया।
उनके अनुसार, यह आयोजन दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करेगा।
बौद्ध विरासत को वैश्विक मंच पर लाने की पहल
जनवरी की शुरुआत में दिल्ली के राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में भगवान बुद्ध से जुड़े पिपराहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया था। उस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने बौद्ध स्थलों के विकास और नई पीढ़ी को बौद्ध मूल्यों से जोड़ने की दिशा में सरकार की पहलों पर जोर दिया था।
पर्यटन और तीर्थयात्रा को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल सांस्कृतिक संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। श्रीलंका दुनिया के प्रमुख बौद्ध देशों में से एक है, जहां लाखों श्रद्धालु बुद्ध से जुड़े स्थलों की यात्रा करते हैं।
देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी से देश में धार्मिक पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों की संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
बुद्ध का संदेश: शांति और करुणा
भगवान बुद्ध का संदेश शांति, करुणा और अहिंसा पर आधारित है। भारत द्वारा इन पवित्र अवशेषों को साझा करना उसी वैश्विक संदेश को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह प्रदर्शनी न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अवसर है, बल्कि भारत-श्रीलंका मित्रता का भी प्रतीक बन गई है।
