बजट 2026: सशस्त्र बलों को मिलेंगे नए फाइटर जेट, युद्धपोत और विशेष सैन्य वाहन
बजट 2026: सशस्त्र बलों को मिलेंगे नए फाइटर जेट, युद्धपोत और विशेष सैन्य वाहन
नई दिल्ली, 1 फरवरी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026 पेश किया। इस वर्ष के बजट में सशस्त्र बलों के पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर) के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पिछले वर्ष यह राशि 1.80 लाख करोड़ रुपए थी। इस तरह इस मद में करीब 24 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है।
इस राशि से भारतीय सशस्त्र बलों के लिए नए फाइटर एयरक्राफ्ट, आधुनिक हथियार, युद्धपोत, पनडुब्बियां, ड्रोन, यूएवी और विशेष सैन्य वाहन खरीदे जाएंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सेना का आधुनिकीकरण अब समय की आवश्यकता बन चुका है।
सरकार ने इस बार स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया है। कुल कैपिटल एक्विजिशन बजट का 75 प्रतिशत, यानी 1.39 लाख करोड़ रुपए, घरेलू उद्योगों से खरीद के लिए निर्धारित किया गया है। इसमें निजी कंपनियों की भी भागीदारी होगी। इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और सहायक उद्योगों को लाभ पहुंचेगा।
रक्षा क्षेत्र को इस बार कुल केंद्रीय बजट का 14.68 प्रतिशत हिस्सा मिला है, जो किसी भी मंत्रालय को मिलने वाला सबसे बड़ा आवंटन है। केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा मंत्रालय के लिए 6.81 लाख करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया था। इस वर्ष सैन्य आधुनिकीकरण पर विशेष फोकस रखा गया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह बढ़ा हुआ बजट देश की सैन्य तैयारियों को मजबूत करने, रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय सुरक्षा को और सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाएगा।
आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। बजट की बड़ी खासियत यह है कि थलसेना, नौसेना और वायुसेना—तीनों के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी गई है। इस राशि से आधुनिक हथियार प्रणालियों, नई तकनीकों और अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद को गति मिलेगी।
राजस्व मद के तहत रक्षा बजट में 3.65 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसमें से 1.58 लाख करोड़ रुपए ऑपरेशनल तैयारियों और रखरखाव पर खर्च किए जाएंगे। इससे जरूरी स्पेयर पार्ट्स, गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों की नियमित आवश्यकताएं पूरी की जा सकेंगी।
डीआरडीओ के बजट में भी वृद्धि की गई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का बजट बढ़ाकर 29,100 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसमें से बड़ी राशि नई तकनीकों, अनुसंधान और आधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास पर खर्च होगी। रक्षा मंत्रालय को आवंटित यह बजट तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर केंद्रित है।
— World No1 News
