अमेरिका के साथ तनाव के बीच ईरान का दावा: निगरानी मिशन पूरा कर सुरक्षित लौटा सैन्य ड्रोन
तेहरान, 4 फरवरी। अमेरिका के साथ जारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसकी सेना का एक मानवरहित ड्रोन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में समुद्री निगरानी मिशन पूरा करने के बाद सुरक्षित अपने बेस पर लौट आया है। ईरानी मीडिया के इस दावे ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका ने हाल ही में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराने की बात कही है।
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में एक नियमित निगरानी अभियान पर तैनात था। मिशन के दौरान उसने आसपास के इलाकों में सैन्य गतिविधियों पर नजर रखी और रियल-टाइम डेटा ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को भेजा। ईरान का कहना है कि यह अभियान पूरी तरह सफल रहा और ड्रोन सुरक्षित लौट आया।
अमेरिकी दावे के बाद आया ईरान का बयान
ईरान का यह दावा अमेरिकी सेना के उस बयान के कुछ ही समय बाद सामने आया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, अरब सागर में तैनात अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के बेहद करीब पहुंचने के बाद एक ईरानी शाहेद-139 ड्रोन को एफ-35सी लड़ाकू विमान की मदद से नष्ट किया गया।
अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई और इस घटना में किसी भी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा, न ही किसी सैन्य उपकरण को क्षति हुई।
ईरानी मीडिया के अलग-अलग दावे
फार्स न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरानी ड्रोन ने क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की प्रभावी निगरानी की और मिशन के दौरान महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र कीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे निगरानी मिशन क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिए जरूरी हैं।
वहीं, ईरान की सेमी-ऑफिशियल तस्नीम न्यूज एजेंसी ने एक अलग दावा करते हुए कहा कि ईरान का अपने एक ड्रोन से संपर्क टूट गया है। एजेंसी के अनुसार, संपर्क टूटने के कारणों की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी। इस बयान ने स्थिति को और अधिक अस्पष्ट बना दिया है, क्योंकि एक ओर सफल मिशन की बात कही जा रही है, तो दूसरी ओर ड्रोन से संपर्क टूटने की खबर भी सामने आई है।
बढ़ते सैन्य तनाव का संकेत
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ गई है। अमेरिकी प्रशासन ने जनवरी के अंत में एक एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और कई युद्धपोतों को क्षेत्र में तैनात किया था। अमेरिका का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित खतरों से निपटने के लिए उठाया गया है।
वहीं, ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसकी सैन्य गतिविधियां रक्षात्मक हैं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में की जाती हैं। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका अपनी सैन्य तैनाती के जरिए क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
विश्लेषकों का मानना है कि ड्रोन से जुड़ी यह ताजा घटनाएं अमेरिका और ईरान के बीच भरोसे की कमी को उजागर करती हैं। मानवरहित विमानों की बढ़ती तैनाती ने समुद्री और हवाई क्षेत्रों में टकराव का खतरा बढ़ा दिया है। किसी भी गलत आकलन या तकनीकी चूक से स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। जहां अमेरिका आत्मरक्षा की कार्रवाई को सही ठहरा रहा है, वहीं ईरान निगरानी मिशन की सफलता और अपने सैन्य अधिकारों पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह घटनाक्रम कूटनीतिक तनाव को कम करता है या क्षेत्र को एक नए टकराव की ओर धकेल देता है।
