बांग्लादेश चुनावी हिंसा: प्रचार के दौरान गोलीबारी में बच्चा समेत पांच घायल
रोहिंग्या कैंप इलाके में चुनाव प्रचार के बीच हमला
बांग्लादेश में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है। इसी बीच कॉक्स बाजार के टेकनाफ उपजिला स्थित अली खली रोहिंग्या कैंप इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान गोलीबारी की घटना सामने आई है, जिसमें एक बच्चे समेत पांच लोग घायल हो गए। यह घटना स्थानीय समयानुसार गुरुवार रात करीब 8:30 बजे कैंप-25 के ब्लॉक ए/04 में हुई, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, टेकनाफ मॉडल पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज मोहम्मद सैफुल इस्लाम ने घटना की पुष्टि की है। बताया गया कि चुनाव प्रचार के लिए एक ट्रक इलाके में घूम रहा था और उसके आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। इसी दौरान अचानक अज्ञात हमलावरों ने ट्रक पर फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी इतनी अचानक हुई कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और अफरा-तफरी मच गई।
घायलों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक शामिल
इस हमले में घायल हुए पांच लोगों में दो रोहिंग्या शरणार्थी और तीन बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। घायलों को तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।
घटना ने यह भी दिखाया कि चुनावी हिंसा का असर सिर्फ स्थानीय नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोहिंग्या शरणार्थी समुदाय भी इसकी चपेट में आ रहा है। कॉक्स बाजार का क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं और सुरक्षा चुनौतियां लगातार बनी रहती हैं।
चुनाव से पहले तेजी से बढ़ रही राजनीतिक हिंसा
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन ‘ऐन ओ सालिश केंद्र’ (एएसके) के आंकड़े बांग्लादेश में बढ़ती राजनीतिक हिंसा की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। संगठन के मुताबिक जनवरी 2026 में हिंसा की घटनाओं में दिसंबर 2025 की तुलना में भारी वृद्धि हुई है।
जनवरी में 75 राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में 616 लोग घायल हुए और 11 लोगों की मौत हुई। इसके मुकाबले दिसंबर 2025 में 18 घटनाओं में 268 लोग घायल हुए थे और चार लोगों की जान गई थी। यह अंतर दर्शाता है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद हिंसा में तेजी आई है।
रिपोर्ट के अनुसार 21 से 31 जनवरी के बीच ही 49 हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें चार लोगों की मौत और 414 लोग घायल हुए। चुनाव की तारीख 12 फरवरी नजदीक आने के साथ यह रुझान और चिंताजनक होता जा रहा है।
पत्रकारों पर भी बढ़ा खतरा, शांति की अपील
मानवाधिकार समूहों ने यह भी बताया कि चुनावी हिंसा के बीच पत्रकारों को भी निशाना बनाया जा रहा है। दिसंबर में 11 पत्रकारों पर हमले हुए थे, जबकि जनवरी में यह संख्या बढ़कर 16 हो गई। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बढ़ती हिंसा पर चिंता जताते हुए मानवाधिकार संगठनों ने सभी राजनीतिक दलों से संयम बरतने और चुनाव प्रचार के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया गया है।
यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि चुनावी माहौल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और हिंसा पर रोक लगाना बांग्लादेश के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
