शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने ममता बनर्जी का किया समर्थन, बोले- “बिना ठोस आधार के कोई सुप्रीम कोर्ट नहीं जाता”
वाराणसी, 4 फरवरी।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई चुनाव आयोग की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है, तो उसे सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ सकता है, और इसका मतलब है कि शिकायत में ठोस आधार होना चाहिए।
चुनाव आयोग पर सवाल
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की शिकायत को नजरअंदाज किया, जिसके कारण उन्हें उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने जोर देते हुए कहा,
“हम किसी की नाराजगी पर नहीं बोलना चाहते, लेकिन इतना जरूर कहेंगे कि अगर किसी का वोट काटा या बढ़ाया जा रहा है, तो इसे तर्कसंगत होना चाहिए। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर इसका असर पड़ता है।”
उनका कहना है कि चुनाव आयोग को पूरी तरह निष्पक्ष रहना चाहिए और किसी भी शिकायत पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं दिखाई देगा, तो लोगों का लोकतंत्र में भरोसा कम हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट जाने का कारण
शंकराचार्य ने ममता बनर्जी के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले पर कहा,
“जिसे दिक्कत होगी, वह जरूर जाएगा। हमने सुना है कि ममता बनर्जी पहले चुनाव आयोग के पास गई थीं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। अगर किसी की सुनवाई नहीं होगी, तो सुप्रीम कोर्ट जाना ही पड़ता है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट जाने का मतलब यह है कि उनके पास कुछ ठोस आधार जरूर था।
“अगर उनकी शिकायत में दम नहीं होता, तो वे सिर्फ राजनीतिक स्तर पर मामला उठातीं। सुप्रीम कोर्ट जाना इस बात का संकेत है कि मामला गंभीर और ठोस था,” उन्होंने कहा।
लोकतंत्र और निष्पक्षता पर जोर
अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र में लोगों की श्रद्धा तभी बनी रहती है जब चुनाव आयोग पूरी तरह निष्पक्ष हो और हर किसी की शिकायत पर ध्यान दे। उन्होंने कहा,
“भारत जैसे देश में लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि संस्थाएं निष्पक्ष रहें और लोगों की आवाज सुनी जाए।”
इस बयान से स्पष्ट है कि शंकराचार्य ने न केवल ममता बनर्जी का समर्थन किया, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतंत्र के प्रति जनता के भरोसे पर भी जोर दिया।
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