भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद रुपया 1 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत, बढ़ा निवेशकों का भरोसा
मुंबई, 3 फरवरी (World No1 News)। भारत और अमेरिका के बीच हुई बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील के बाद मंगलवार को भारतीय मुद्रा बाजार में जबरदस्त सकारात्मक असर देखने को मिला। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 1 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत होकर करीब 90.29 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया। इस मजबूती ने न केवल करेंसी मार्केट में उत्साह बढ़ाया, बल्कि घरेलू और विदेशी निवेशकों के भरोसे को भी मजबूती दी है।
सोमवार को रुपया 91.53 पर बंद हुआ था। इससे पहले के सत्र में भी रुपया 48 पैसे मजबूत होकर दो हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। बाजार रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पॉट मार्केट में हस्तक्षेप कर रुपये को सहारा दिया, जिससे अस्थिरता सीमित रही।
ट्रेड डील से क्यों मजबूत हुआ रुपया?
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत-अमेरिका ट्रेड डील ने बाजार में फैली अनिश्चितता को काफी हद तक कम कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि भारतीय सामानों पर लगने वाला टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद लिया गया।
इस डील से भारत के निर्यात को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। निर्यात बढ़ने से डॉलर की आवक बढ़ेगी, जिससे रुपये की मांग मजबूत होगी। यही वजह है कि करेंसी बाजार में रुपये को लेकर सकारात्मक रुख बना हुआ है।
रुपये की चाल और तकनीकी स्तर
विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया पहले और ज्यादा मजबूत हुआ था, लेकिन बाद में यह 90.20 से 91.20 के दायरे में स्थिर हो गया। 92 के ऊपर टिक न पाने के बाद इसमें हल्की गिरावट देखने को मिली, जिसे बाजार जानकार सामान्य करेक्शन मान रहे हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, मौजूदा कमजोरी अस्थायी है और रुपये का मीडियम से लॉन्ग टर्म ट्रेंड अभी भी मजबूत बना हुआ है। अगर रुपया 90.50–90.80 के नीचे जाता है, तो यह 90 या यहां तक कि 89.80 के स्तर को भी छू सकता है।
विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा
ट्रेड डील के बाद विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर बढ़ता नजर आ रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक, अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट में निवेश बढ़ा सकते हैं।
अनिश्चितता कम होने से निवेशक लंबी अवधि के लिए भारत को एक सुरक्षित और आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में देख रहे हैं। इससे न केवल शेयर बाजार को सपोर्ट मिलेगा, बल्कि रुपये की मांग भी बढ़ेगी, जो इसे और मजबूत बना सकती है।
सोना-चांदी पर रुपये की मजबूती का असर
डॉलर के मुकाबले रुपये के मजबूत होने का असर एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतों पर भी देखा जा रहा है। फिलहाल कीमती धातुओं में तेज उछाल देखने को नहीं मिल रहा है, क्योंकि मजबूत रुपया आयात लागत को कम करता है।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यम अवधि में सोने और चांदी का रुझान अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। वैश्विक अनिश्चितता और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें कीमती धातुओं को सपोर्ट दे सकती हैं।
तेल आयात और भुगतान संतुलन पर असर
इस ट्रेड डील में यह भी संकेत दिया गया है कि भारत रूस से तेल की खरीद कम करेगा और अमेरिका व संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाएगा। अगर ऐसा होता है, तो इससे भारत के ऊर्जा आयात का स्वरूप बदल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के भुगतान संतुलन (BOP) की स्थिति में सुधार हो सकता है, जिससे रुपये को दीर्घकालिक मजबूती मिल सकती है।
RBI की भूमिका रहेगी अहम
आने वाले दिनों में रुपये की चाल तय करने में RBI की नीति और हस्तक्षेप बेहद अहम रहने वाला है। अगर रुपया बहुत तेजी से मजबूत होता है, तो RBI निर्यातकों को नुकसान से बचाने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है। वहीं, अत्यधिक कमजोरी की स्थिति में भी केंद्रीय बैंक बाजार में सक्रिय रह सकता है।
आगे बाजार का रुख कैसा रह सकता है?
विश्लेषकों के मुताबिक, भारत-अमेरिका ट्रेड डील, भारत-यूरोपीय संघ (EU) एफटीए को लेकर बढ़ती उम्मीदें और विकास पर केंद्रित बजट—इन तीनों फैक्टर्स से बाजार का माहौल आने वाले महीनों में और बेहतर हो सकता है।
इसका सीधा असर विदेशी पूंजी प्रवाह, शेयर बाजार की मजबूती और रुपये की स्थिरता पर पड़ेगा। अगर वैश्विक हालात अनुकूल रहे, तो भारतीय रुपया आने वाले समय में एशिया की मजबूत मुद्राओं में शामिल रह सकता है।
