बिहार: गया स्टेशन प्लेटफॉर्म से मृत रेड सैंड बोआ सांप के साथ दो तस्कर गिरफ्तार
गया, 4 फरवरी।
बिहार के गया रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दुर्लभ प्रजाति के मृत रेड सैंड बोआ सांप की तस्करी कर रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस घटना के सामने आने के बाद प्लेटफॉर्म पर हड़कंप मच गया और अवैध वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध हरकत से हुआ खुलासा
मंगलवार शाम आरपीएफ की टीम गया रेलवे स्टेशन पर नियमित गश्त कर रही थी। इसी दौरान प्लेटफॉर्म नंबर 1बी पर दो युवक संदिग्ध हालत में बैग लेकर घूमते दिखाई दिए।
जब पुलिस टीम ने उन्हें रुकने का इशारा किया, तो दोनों युवक घबराकर भागने लगे। इससे पुलिस का शक और गहरा गया। तत्परता दिखाते हुए आरपीएफ जवानों ने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया।
बैग की तलाशी में मिला दुर्लभ मृत सांप
जब पुलिस ने दोनों के बैग की तलाशी ली तो अंदर से दुर्लभ प्रजाति का मृत रेड सैंड बोआ सांप बरामद हुआ। सांप देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए और प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
आरपीएफ इंस्पेक्टर बनारसी यादव ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों की पहचान जहानाबाद जिले के मखदुमपुर निवासी उपेंद्र कुमार और गया जिले के चाकंद के अमराहा गांव निवासी मोहम्मद सादुल्ला के रूप में हुई है।
वन विभाग को सौंपी गई कार्रवाई
घटना की सूचना तुरंत वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही स्नेक कैचर और क्यूआरटी टीम मौके पर पहुंची और सांप को जब्त कर लिया गया। इसके बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
क्यों की जाती है रेड सैंड बोआ की तस्करी?
रेड सैंड बोआ सांप अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी में बेहद मांग वाला जीव माना जाता है। अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और कथित औषधीय उपयोग के कारण इसकी अवैध बाजार में भारी कीमत लगती है। कई मामलों में इसकी कीमत लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक बताई जाती है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार तस्कर इस मृत सांप को किसी दूसरे स्थान पर पहुंचाने की योजना बना रहे थे। इस घटना से संकेत मिलता है कि अवैध वन्यजीव तस्करी का नेटवर्क रेलवे मार्ग का इस्तेमाल कर सकता है।
रेड सैंड बोआ: दुर्लभ और गैर-विषैला सरीसृप
रेड सैंड बोआ को आम बोलचाल में दोमुंहा सांप भी कहा जाता है। यह पूरी तरह गैर-विषैला होता है और पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
यह सांप जमीन के भीतर रहने वाला प्राणी है और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसके बावजूद अंधविश्वास और लालच के कारण इसकी अवैध तस्करी जारी है, जो वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला दर्ज
आरपीएफ ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तस्करी के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसका नेटवर्क कितना बड़ा है।
बढ़ती वन्यजीव तस्करी पर चिंता
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अवैध वन्यजीव व्यापार देश के कई हिस्सों में सक्रिय है। रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल कर तस्कर वन्यजीवों की तस्करी करने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों पर सख्ती और जागरूकता दोनों जरूरी हैं, ताकि दुर्लभ जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
