आपदा में महत्वपूर्ण है गोल्डन ऑवर, सबकुछ ध्वस्त होने पर भी काम करेगा कम्युनिकेशन सिस्टम
नई दिल्ली, 29 जनवरी।
आपदा के दौरान ‘गोल्डन ऑवर’, यानी शुरुआती समय, बेहद महत्वपूर्ण होता है। आपदा के समय इस समय में लोगों की मदद कैसे की जाए, इस पर भारतीय सेना ने चर्चा की। आईआईटी जैसे संस्थान भी इसमें शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने भूस्खलन जैसी आपदाओं की पूर्व चेतावनी देने वाले सिस्टम पेश किए। इसके साथ ही ऐसा कम्युनिकेशन सिस्टम भी दिखाया गया जो आपदा में सब कुछ ध्वस्त होने के बावजूद भी काम करता रहता है।
यह कदम भारत की आंतरिक सुरक्षा और मानवीय सहायता संरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के साथ रणनीतिक साझेदारी की। इस साझेदारी के तहत एक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें नेक्स्ट-जेन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस आपदा पूर्व चेतावनी सिस्टम प्रदर्शित किए गए। इसके अलावा उपग्रह-लिंक्ड संचार मॉड्यूल भी पेश किए गए।
ये सिस्टम किसी आपदाग्रस्त क्षेत्र में नेटवर्क ठप होने के बावजूद चालू रहते हैं। भविष्य की शहरी और ग्रामीण बाढ़ के लिए समाधान भी प्रस्तावित किए गए। सम्मेलन में सैन्य नेतृत्व, एनडीएमए नीति निर्माताओं और शैक्षणिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य भारत को रिएक्टिव आपदा मॉडल से हटाकर प्रोएक्टिव मॉडल की ओर ले जाना है।
पश्चिमी कमान के मुख्यालय में नवाचारों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें इंटरएक्टिव तकनीकी सत्र और अत्याधुनिक प्रदर्शनी शामिल थी। यहां उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम आने वाले बचाव गियर, सीबीआरएन सुरक्षा सूट और उन्नत चिकित्सा ट्रॉमा किट भी प्रदर्शित किए गए।
सम्मेलन के माध्यम से सामुदायिक आउटरीच को मजबूत करने का प्रयास किया गया। यह पहल स्थानीय आबादी को रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में सशक्त बनाने के लिए डिजाइन की गई थी। विशेषज्ञों ने 2026 के लिए विशिष्ट एक्शन पॉइंट्स तय किए, जिनमें संयुक्त प्रशिक्षण कैलेंडर और एकीकृत कमांड संरचना शामिल हैं।
आयोजन के नेतृत्वकर्ता ने कहा, “चंडीमंदिर में गुरुवार को देखा गया तालमेल राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति भारत के एकीकृत दृष्टिकोण का प्रमाण है। हम तकनीक, रणनीति और मानवीय साहस के मिलन से ‘जीरो-फेल मिशन’ सुनिश्चित कर रहे हैं।”
सम्मेलन का समापन किया गया और इस दौरान सैन्य-नागरिक तालमेल पर जोर दिया गया। एनडीएमए सचिव मनीष भारद्वाज और 11वीं कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अजय चांदपुरिया ने राहत कार्यों में गोल्डन ऑवर के सदुपयोग के प्रोटोकॉल पर चर्चा की। आईआईटी मंडी के विशेषज्ञों ने रिमोट सेंसिंग और भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणालियों की सफलताओं को प्रस्तुत किया। एनडीआरएफ ने 2025 की बाढ़ में संसाधनों की तैनाती और रीसाइक्लिंग की चुनौतियों का विश्लेषण किया।
भारतीय सेना का कहना है कि पश्चिमी कमान आपदा प्रबंधन कॉन्क्लेव ने अंतर-एजेंसी सहयोग के लिए नया बेंचमार्क स्थापित किया है। यह सुनिश्चित करता है कि देश अपने नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को किसी भी आपदा से बचाने के लिए तैयार रहे।
— कोबरा पोस्ट न्यूज़ (Kobrapost News)
