खैबर पख्तूनख्वा में राजनीतिक टकराव और बढ़ता आतंकवाद
सियासी अस्थिरता
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और राज्यपाल फैसल करीम कुंडी के बीच गहराता राजनीतिक टकराव क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अफरीदी ने हाल ही में सेफ सिटीज प्रोजेक्ट की समीक्षा की, जिसमें प्रमुख शहरों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के कदम शामिल थे, लेकिन राज्यपाल कुंडी ने इस पहल को आलोचना का लक्ष्य बनाया। उन्होंने अफरीदी पर आरोप लगाया कि वह सुरक्षा जिम्मेदारियों की अनदेखी कर रहे हैं और राजनीतिक रैलियों और प्रदर्शन के माध्यम से अस्थिरता बढ़ा रहे हैं। इस बीच संघीय सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने भी अफरीदी की आलोचना करते हुए कहा कि आतंकवादियों द्वारा अफगान जमीन का इस्तेमाल बढ़ाने वाले बयान स्थिति को और जटिल बना सकते हैं।
सेफ सिटीज परियोजना और सुरक्षा उपाय
मुख्यमंत्री अफरीदी ने पेशावर, डेरा इस्माइल खान, बन्नू और लक्की मरवत में सेफ सिटीज पहल के क्रियान्वयन के लिए उच्चस्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की और महत्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी कैमरों की संख्या बढ़ाई। पेशावर में 711, डेरा इस्माइल खान में 88, बन्नू में 76 और लक्की मरवत में 47 कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने इस योजना को अन्य क्षेत्रों और विलय किए गए जिलों जैसे टैंक, उत्तर वजीरिस्तान और करक तक विस्तार देने के निर्देश दिए। इस पहल का उद्देश्य अपराध की रोकथाम, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और पुलिस की क्षमता को कमांड सेंटरों के माध्यम से बढ़ाना है।
राज्यपाल की प्रतिक्रिया और सुरक्षा चिंता
हालांकि, राज्यपाल कुंडी ने अफरीदी के प्रयासों को वास्तविक सुरक्षा खतरों से ध्यान भटकाने वाला बताया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अफरीदी प्रांत छोड़कर अन्य जगहों पर राजनीतिक रैलियों का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है। कुंडी ने पुलिसकर्मियों, सैनिकों और सरकारी अधिकारियों पर बढ़ते हमलों का हवाला दिया और टैंक जिले में आईईडी हमले में सात पुलिसकर्मियों की मौत तथा डेरा इस्माइल खान और बन्नू में हमलों की बढ़ोतरी का उल्लेख किया। उन्होंने प्रांतीय सरकार से सैन्य अभियानों को तेज करने, पुलिस और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट की क्षमताओं को बढ़ाने और विलय किए गए क्षेत्रों में लेवी बलों को प्रशिक्षित करने की मांग की।
आतंकवाद की गंभीरता और सांख्यिकीय चित्र
खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। 2024 में प्रांत में 702 आतंकी घटनाएं हुईं, जिसमें कुल 1,363 लोगों की मौत हुई—इसमें 288 नागरिक, 421 सुरक्षाकर्मी और 654 आतंकवादी शामिल थे। यह संख्या 2023 के 941 मौतों की तुलना में लगभग 44.84 प्रतिशत अधिक थी। 2025 में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने 1,588 मामले दर्ज किए, 500 से अधिक हमलों की रिपोर्ट हुई और 510 पुलिसकर्मियों पर निशाना बनाए गए। सुरक्षा बलों ने 420 आतंकवादियों को मार गिराया और 1,244 संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इसके बावजूद कई जिले जैसे बन्नू, डेरा इस्माइल खान, लक्की मरवत, हंगू और पेशावर लगातार हमलों की चपेट में रहे, जिनमें से कई टीटीपी हमले अफगान सीमा के ठिकानों से जुड़े पाए गए।
राज्यपाल कुंडी ने राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर संघीय और प्रांतीय सरकारों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब नेता सीमाओं और सुरक्षा के बजाय राजनीतिक रैलियों को प्राथमिकता देते हैं, तो तालिबानीकरण और आतंकवाद का खतरा और बढ़ता है। इस स्थिति ने खैबर पख्तूनख्वा में राजनीतिक और सुरक्षा दोनों ही स्तरों पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया है।
