जीपीयू की कमी भारत के एआई सपनों में बड़ी बाधा
सांसद राघव चड्ढा का चिंता व्यक्त करना
नई दिल्ली में राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वाकांक्षाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में एआई विकास की राह में सबसे बड़ी रुकावट पूंजी, प्रतिभा या निवेश की कमी नहीं है, बल्कि कंप्यूटेशनल संसाधनों की उपलब्धता है। विशेष रूप से ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स यानी जीपीयू की कमी ने एआई मॉडल्स के प्रशिक्षण और डेटा सेंटर विस्तार में बड़ी मुश्किलें पैदा की हैं।
चड्ढा ने बताया कि भारत में वर्तमान में लगभग 34,000 जीपीयू उपलब्ध हैं, जो वैश्विक स्तर पर अत्याधुनिक एआई सिस्टम तैयार करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से पूछा कि सरकार इन संसाधनों तक सुरक्षित, स्थिर और अनुमानित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए क्या लक्ष्य और रणनीति बना रही है।
जीपीयू की वैश्विक चुनौती
सांसद ने सदन को अवगत कराया कि जीपीयू की बढ़ती लागत और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण देश में एआई रिसर्च और विकास धीमा पड़ रहा है। भारत में एआई स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थान सीमित कंप्यूटिंग संसाधनों के कारण बड़े मॉडल्स पर काम करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। चड्ढा ने यह भी कहा कि यह समस्या न केवल तकनीकी बल्कि रणनीतिक महत्व की है, क्योंकि एआई में वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि जीपीयू की कमी एक व्यापक चुनौती है। उन्होंने कहा कि एआई और उससे जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए उच्च स्तरीय कंप्यूटेशनल क्षमता जरूरी है। मंत्री ने इंडिया एआई मिशन के तहत ‘कंप्यूट’ को एक अलग और महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में रखा गया है, जिसके जरिए सूचीबद्ध सेवा प्रदाताओं से हाई-एंड कंप्यूटिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पात्र उपयोगकर्ताओं को इन सेवाओं पर लागत में 40 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है।
जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि बड़े एआई मॉडल्स, जिनमें 30 अरब से 65 अरब पैरामीटर वाले मॉडल शामिल हैं, उनके लिए अतिरिक्त कंप्यूट संसाधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। मंत्रालय ने निजी क्षेत्र को भी इस दिशा में निवेश के लिए आमंत्रित किया है और एक दिन पहले निजी परियोजनाओं के लिए प्रस्तावों की कॉल जारी की गई।
भारत की एआई महत्वाकांक्षा और भविष्य की दिशा
मंत्री ने विश्वास जताया कि इन प्रयासों के जरिए भारत वैश्विक मानकों के बराबर पहुंचेगा और एआई में नेतृत्व हासिल करने के लक्ष्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह सतर्क है और सक्रिय रूप से समाधान की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में देश में एआई अनुसंधान और विकास के लिए पर्याप्त कंप्यूटेशनल संसाधन सुनिश्चित करने के लिए और अधिक रणनीतिक पहलें की जाएंगी।
भारत की एआई महत्वाकांक्षाएं सिर्फ तकनीकी विकास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा, नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था में नेतृत्व हासिल करने के लक्ष्य से भी जुड़ी हैं। जीपीयू और अन्य कंप्यूटेशनल संसाधनों में निवेश बढ़ाने से देश न केवल बड़े एआई मॉडल्स विकसित कर पाएगा, बल्कि वैश्विक एआई मंच पर अपनी स्थिति भी मजबूत कर सकेगा।
