न्यू स्टार्ट संधि खत्म होने पर बढ़ी वैश्विक चिंता, यूएन प्रमुख बोले—यह बेहद गंभीर समय
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली ‘न्यू स्टार्ट’ संधि की अवधि समाप्त होने को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मोड़ बताया है। उनका कहना है कि दुनिया अब ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां पहली बार कई दशकों बाद दोनों सबसे बड़े परमाणु शक्तियों के रणनीतिक परमाणु हथियारों पर कोई कानूनी और बाध्यकारी सीमा नहीं रह जाएगी।
गुटेरेस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आधी सदी से भी अधिक समय से परमाणु हथियार नियंत्रण व्यवस्था ने वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। शीत युद्ध के दौर में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच कई तनावपूर्ण परिस्थितियां पैदा हुईं, लेकिन हथियार नियंत्रण समझौतों ने गलत आकलन और संभावित परमाणु युद्ध जैसे बड़े संकटों को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन समझौतों के कारण दोनों देशों ने अपने परमाणु हथियारों के विशाल भंडार को धीरे-धीरे कम किया, जिससे दुनिया को अपेक्षाकृत सुरक्षित बनाने में मदद मिली।
‘न्यू स्टार्ट’ संधि इसी लंबी प्रक्रिया की आखिरी बड़ी कड़ी थी। यह समझौता अमेरिका और रूस के तैनात रणनीतिक परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाली मिसाइल प्रणालियों की संख्या को सीमित करता था। इससे दोनों देशों के बीच पारदर्शिता और भरोसा कायम रखने में भी मदद मिलती थी, क्योंकि इस संधि के तहत निरीक्षण और सत्यापन की व्यवस्था भी मौजूद थी।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने चेतावनी दी कि इस संधि की समाप्ति ऐसे समय पर हो रही है जब दुनिया पहले से ही कई भू-राजनीतिक तनावों और संघर्षों का सामना कर रही है। उनका कहना है कि बीते कई दशकों में पहली बार परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा इतना अधिक महसूस किया जा रहा है। ऐसे समय में हथियार नियंत्रण व्यवस्था का कमजोर होना वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
गुटेरेस ने यह भी कहा कि हालांकि यह स्थिति चिंताजनक है, लेकिन इसे पूरी तरह निराशाजनक नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने इसे एक अवसर के रूप में देखने की अपील की। उनके अनुसार यह समय है जब अमेरिका और रूस नई परिस्थितियों के अनुरूप एक आधुनिक और प्रभावी हथियार नियंत्रण ढांचा तैयार कर सकते हैं। ऐसा ढांचा जो बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए परमाणु जोखिम को कम करने में मदद करे।
उन्होंने दोनों देशों के नेताओं से आग्रह किया कि वे केवल बयानबाजी तक सीमित न रहें, बल्कि जल्द से जल्द बातचीत की मेज पर लौटें और एक नई व्यवस्था पर सहमति बनाएं। ऐसी व्यवस्था जिसमें परमाणु हथियारों पर जांच योग्य सीमाएं तय हों, पारदर्शिता बढ़े और वैश्विक सुरक्षा मजबूत हो सके।
यह भी उल्लेखनीय है कि ‘न्यू स्टार्ट’ संधि वर्ष 2011 में लागू हुई थी और यह अमेरिका और रूस के बीच अंतिम प्रमुख हथियार नियंत्रण समझौता थी। इससे पहले वर्ष 2019 में अमेरिका इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस संधि से हट गया था, जिसके बाद से वैश्विक हथियार नियंत्रण व्यवस्था पहले ही कमजोर हो चुकी थी। अब ‘न्यू स्टार्ट’ के समाप्त होने के बाद परमाणु हथियार नियंत्रण का भविष्य और अधिक अनिश्चित हो गया है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
