अनुपम खेर गुरु से मिलकर हुए भावुक, बोले– “अब मुझे ‘बेटा’ कहने वाले बहुत कम रह गए हैं”
मुंबई, 3 फरवरी (आईएएनएस)। दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर इन दिनों गुरुग्राम में अपनी चर्चित फिल्म ‘खोसला का घोसला 2’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। इसी दौरान उनके जीवन का एक बेहद भावुक और खास पल सामने आया, जब वे अपने कॉलेज के समय के म्यूजिक टीचर प्रोफेसर सोम दत्त बट्टू से मिले।
इस मुलाकात का वीडियो और भावनात्मक किस्सा अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर अपने फैंस के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उनके गुरु को यह पता चला कि वे गुरुग्राम में शूटिंग कर रहे हैं, तो उन्होंने मिलने की इच्छा जताई। इसके बाद दोनों की यह यादगार मुलाकात हुई।
अनुपम खेर ने वीडियो के साथ लिखा,
“53 साल बाद मुलाकात! प्रोफेसर सोम दत्त बट्टू 1972-73 में शिमला में मेरे म्यूजिक टीचर हुआ करते थे। उन्होंने हमारे कॉलेज के नाटकों के लिए संगीत भी तैयार किया था। जब मैं गुरुग्राम में ‘खोसला का घोसला 2’ की शूटिंग कर रहा था, तब किसी तरह उनसे मुलाकात हो गई।”
उन्होंने आगे लिखा,
“उनका आशीर्वाद पाकर दिल बहुत खुश हो गया। वे मुझे बार-बार ‘बेटा’ कहकर बुला रहे थे। इस उम्र में मुझे ‘बेटा’ कहने वाले बहुत कम लोग हैं, मां के अलावा।”
अपने गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अनुपम खेर ने लिखा कि भारत सरकार ने प्रोफेसर सोम दत्त बट्टू को 2024 में पद्म श्री से सम्मानित किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा,
“सच कहूं तो उस जमाने में स्कूल और कॉलेज के शिक्षक सिर्फ विषय नहीं पढ़ाते थे, बल्कि जिंदगी और उसके अहम सबक भी सिखाते थे। सर, आपके प्यार, ज्ञान और सीख के लिए दिल से धन्यवाद।”
‘खोसला का घोसला 2’ को लेकर उत्साह
फिल्म ‘खोसला का घोसला 2’, साल 2006 में आई सुपरहिट फिल्म ‘खोसला का घोसला’ का सीक्वल है। पहली फिल्म एक मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी थी, जो अपनी जमीन हड़पने वाले भू-माफिया से संघर्ष करता है। इस फिल्म का निर्देशन दिबाकर बनर्जी ने किया था और इसमें अनुपम खेर, बोमन ईरानी, रणवीर शौरी और विनय पाठक जैसे दमदार कलाकार नजर आए थे।
अब सीक्वल में पुराने कलाकारों के साथ कुछ नए चेहरे भी देखने को मिलेंगे। फिल्म को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह है और वे बेसब्री से इसके रिलीज होने का इंतजार कर रहे हैं।
अनुपम खेर की यह भावुक मुलाकात न सिर्फ गुरु-शिष्य के रिश्ते की गहराई को दिखाती है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी जड़ों से जुड़ाव कितना जरूरी होता है।
