बजट 2026-27: ऐलानों से देश का मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम मजबूत होगा: इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री
नई दिल्ली, 1 फरवरी।
केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इंडस्ट्री संगठनों का मानना है कि इस बजट में नीतिगत निरंतरता, दीर्घकालिक दृष्टि और लक्षित सुधारों के जरिए भारत के मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूती देने का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। यह बजट न केवल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाता है, बल्कि भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को नई गति
इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री बॉडी इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने बजट में घोषित इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के विस्तार का स्वागत किया है। इंडस्ट्री का कहना है कि इन पहलों से देश में घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाएं (Supply Chains) और वैल्यू चेन मजबूत होंगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।
आईसीईए के अनुसार, यह कदम भारत में:
- सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा
- इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करेगा
- रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा
- वैश्विक कंपनियों का निवेश आकर्षित करेगा
डेटा सेंटर और क्लाउड इकोनॉमी को बढ़ावा
बजट 2026-27 में भारत स्थित डेटा सेंटरों के माध्यम से वैश्विक क्लाउड सेवाएं प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक कर छूट देने की घोषणा को इंडस्ट्री ने दूरदर्शी फैसला बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत एक प्रमुख ग्लोबल डेटा और क्लाउड हब के रूप में उभर सकता है।
इस फैसले से:
- भारत में डेटा लोकलाइजेशन को बढ़ावा मिलेगा
- क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश आएंगे
- डिजिटल इकोनॉमी को दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी
- टेक्नोलॉजी सेक्टर में हाई-स्किल जॉब्स बढ़ेंगी
इंडस्ट्री लीडर्स की प्रतिक्रिया
आईसीईए के अध्यक्ष पंकज मोहिंद्रू ने कहा,
“बजट 2026-27 निरंतरता, व्यापकता और लक्षित सुधारों के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग-आधारित विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। ईसीएमएस का विस्तार, आईएसएम 2.0 और क्लाउड व डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए दीर्घकालिक प्रोत्साहन नीतिगत स्थिरता का स्पष्ट संकेत हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में भारत की तेज प्रगति इस बात का प्रमाण है कि सही नीतियों से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा की जा सकती है।
इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा कि आईएसएम 2.0 भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं के लिए बेहद अहम है।
उन्होंने कहा,
“यह केवल फैब-केंद्रित मॉडल से आगे बढ़कर एक पूर्ण वैल्यू-चेन रणनीति को दर्शाता है, जिसमें उपकरण, सामग्री, भारतीय बौद्धिक संपदा और सप्लाई चेन को मजबूत करना शामिल है।”
एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग को समर्थन
ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा कि बजट में बुनियादी ढांचे, सुधारों और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग पर सरकार का फोकस साफ दिखाई देता है। इसके साथ ही एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए कई अहम घोषणाएं की गई हैं।
बजट के प्रमुख प्रस्तावों में शामिल हैं:
- 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई डेवलपमेंट फंड
- कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग योजना
- रेयर अर्थ कॉरिडोर की स्थापना
- घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुधार
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 को इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के लिए एक मजबूत, दूरदर्शी और विकास-उन्मुख बजट माना जा रहा है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, क्लाउड सेवाएं और एमएसएमई सेक्टर पर दिया गया जोर भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में एक सशक्त खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। इंडस्ट्री का मानना है कि यदि इन घोषणाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
