बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर सोनू सूद की चिंता – सोशल मीडिया और गेमिंग पर सख्त कानून की मांग
मुंबई, 4 फरवरी।
अभिनेता सोनू सूद ने एक बार फिर बच्चों की डिजिटल सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने यह बात इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए साझा की और सरकार से नए कानून बनाने की अपील की।
गाजियाबाद की घटना ने बढ़ाई चिंता
सोनू सूद ने अपनी पोस्ट में गाजियाबाद की एक दुखद घटना का जिक्र किया, जिसमें तीन छोटी बच्चियों की जान चली गई। उन्होंने कहा कि यह घटना हिंसा या गरीबी से नहीं, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल लत के दबाव से जुड़ी बताई जा रही है। इस घटना को उन्होंने समाज और सरकार के लिए एक चेतावनी बताया और कहा कि अब ठोस कदम उठाने का समय आ गया है।
16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बैन की मांग
सोनू सूद का मानना है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पूरी तरह बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल पढ़ाई से जुड़े डिजिटल उपयोग की अनुमति होनी चाहिए, जबकि मनोरंजन और सोशल मीडिया से बच्चों को दूर रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार बच्चों को एल्गोरिदम नहीं बल्कि सही मार्गदर्शन, प्यार और देखभाल की जरूरत है।
बचपन और स्क्रीन के बीच संतुलन की जरूरत
अपने संदेश में सोनू सूद ने कहा कि बच्चों का बचपन स्क्रीन में नहीं बल्कि वास्तविक दुनिया में होना चाहिए। उनका कहना है कि इंटरनेट और फोन का उपयोग सीमित होना चाहिए क्योंकि डिजिटल लत बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर असर डाल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
नए कानून बनाने की अपील
सोनू सूद ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि यह किसी पर आरोप लगाने का मुद्दा नहीं है बल्कि बच्चों को बचाने का मुद्दा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस दिशा में सख्त कानून बनना जरूरी है ताकि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं केवल खबर बनकर न रह जाएं, बल्कि उनसे सीख लेकर ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए।
पहले भी उठा चुके हैं यह मुद्दा
सोनू सूद इससे पहले भी बच्चों के स्क्रीन टाइम और डिजिटल लत पर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया द्वारा बच्चों के लिए कुछ प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने की पहल का समर्थन किया था और कहा था कि भारत में भी ऐसे कानून बनने चाहिए।
समाज और नीति के स्तर पर बढ़ती बहस
सोनू सूद की इस मांग ने बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर एक बड़ी बहस को जन्म दिया है। आज के समय में बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत, मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाला असर और ऑनलाइन गेमिंग व सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे मुद्दे तेजी से सामने आ रहे हैं। अब यह चर्चा केवल परिवारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि नीति और कानून के स्तर तक पहुंच चुकी है।
बच्चों की सुरक्षा, उनका मानसिक विकास और संतुलित बचपन सुनिश्चित करना आज समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी बन चुका है।
