अमेरिका के मुद्दे पर राज्यसभा में हंगामा: विपक्ष का बहिष्कार, जेपी नड्डा ने बताया गैर-राष्ट्रवादी व्यवहार
नई दिल्ली, 3 फरवरी (World No1 News)। भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुए समझौते को लेकर मंगलवार को राज्यसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इस अहम अंतरराष्ट्रीय समझौते की जानकारी भारतीय संसद के बजाय वाशिंगटन से सामने आ रही है, जो संसदीय लोकतंत्र के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। इसी मुद्दे पर नारेबाजी करते हुए विपक्ष ने सदन का बहिष्कार कर दिया।
वहीं, सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये को गैर-राष्ट्रवादी और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह आचरण देशहित के खिलाफ है और इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं कहा जा सकता।
विपक्ष का आरोप: जानकारी संसद से पहले अमेरिका में क्यों?
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि भारत-अमेरिका के बीच हुए समझौते की सूचनाएं पहले अमेरिका से आ रही हैं, जबकि भारतीय संसद को इसकी औपचारिक जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और क्या सरकार संसद को दरकिनार कर रही है।
विपक्ष का कहना था कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर पहले संसद को विश्वास में ले। जब अमेरिका की ओर से बयान और जानकारी सार्वजनिक हो रही है, तो भारत में चुप्पी क्यों है—यही विपक्ष का मुख्य सवाल था।
जेपी नड्डा का जवाब: सरकार चर्चा से नहीं भाग रही
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए नेता सदन जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि सरकार पूरी तरह पारदर्शी है और इस ट्रेड डील से जुड़ी सभी जानकारियां संसद में दी जाएंगी।
उन्होंने कहा कि सोमवार देर रात अमेरिका के राष्ट्रपति ने एक सार्वजनिक पोस्ट के जरिए टैरिफ और भारत-अमेरिका संबंधों पर अपनी बात रखी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा भी की गई। इसके बाद प्रधानमंत्री ने भी उसी मंच पर जवाब देते हुए भारत-अमेरिका मैत्री और व्यापारिक संबंधों की मजबूती की बात कही।
जेपी नड्डा ने कहा कि संबंधित विभागों के मंत्री इस पूरे समझौते पर राज्यसभा को विस्तृत जानकारी देंगे, लेकिन विपक्ष ने चर्चा का इंतजार करने के बजाय हंगामा और बहिष्कार का रास्ता चुना।
“हंगामा लोकतंत्र के लिए घातक”
जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बार-बार सदन में शोर-शराबा करना लोकतंत्र के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि सरकार हर सवाल का जवाब देने को तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा से भाग रहा है।
उनका कहना था कि यह विपक्ष की हताशा को दर्शाता है, क्योंकि उनके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष हर विषय पर सिर्फ राजनीति करना चाहता है, चाहे वह देश के व्यापारिक हितों से जुड़ा मामला ही क्यों न हो।
गैर-राष्ट्रवादी व्यवहार का आरोप
नेता सदन ने विपक्ष के बहिष्कार को गैर-राष्ट्रवादी व्यवहार बताते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों को न तो देश के विकास से मतलब है और न ही व्यापारिक प्रगति से।
जेपी नड्डा ने कहा,
“आप देश में यह माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार कुछ छिपा रही है, जबकि सच्चाई यह है कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है।”
उन्होंने आगे कहा कि पहले विपक्ष यह कह रहा था कि अमेरिका ने 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया, सरकार जवाब दे। अब जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्वयं टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की और प्रधानमंत्री की खुले तौर पर प्रशंसा की, तब भी विपक्ष संतुष्ट नहीं है।
सदन का बहिष्कार और सियासी संदेश
जेपी नड्डा के स्पष्टीकरण के बावजूद विपक्ष ने नारेबाजी जारी रखी और अंततः सदन का बहिष्कार कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कदम चर्चा से बचने और राजनीतिक संदेश देने के लिए उठाया गया।
सत्तापक्ष का मानना है कि ऐसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संसद के भीतर गंभीर और तथ्यपूर्ण बहस होनी चाहिए, न कि बहिष्कार और हंगामा।
